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abhivyakti.peperonity.net

हमें क्या फर्क पड़ता है..

14.07.2011 07:58 EDT
हम महान भारत देश के निवासी हैं,हमें क्या फर्क पड़ता है. भारत जो कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था,हम आज भी उसी दिवास्वप्न
में जी रहे हैं,क्या फर्क पड़ता है अगर कोई राजा,कोई कलमाड़ी या कोई कनिमोझी इस चिड़िया के कुछ पँख उखाड़ भी लें,
घोटालों पर घोटाले होते रहें पर हमें कोई फर्क नहीं पड़ता.
क्योंकि हम महान जो हैं. हम इतने दयालु हैं कि आधी रात को सो रहे असहाय वृद्धों,महिलाओं को पीट पीट कर भगा देने वालों के
प्रति कोई रोष नहीं दिखाते. कोई कुछ भी करे हमें सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ता, हमारे प्रेम की पराकाष्ठा तो देखिए..
विश्व बंधुत्व का नारा लगाते लगाते इसकी लय में इतने तल्लीन हो जाएंगे कि हमारा कोई पड़ोसी आकर हमारा खून पानी की तरह बहा
देगा पर हमारे चेहरों पर शिकन तक नहीं आएगी, आए भी क्यों? क्योंकि हम तो महान है और हमें क्या फर्क पड़ता है, हम बिल्कुल
पूरी तरह से तैयार है ऐसे और अनगिनत घाव झेलने के लिए..अब यूँ बम धमाके होते रहे,लोग मरते रहे,देश लुटता रहे...हमारी बला से
हमें क्या फर्क पड़ता है...

दोस्तो, बड़ा दुःख हुआ यह सब लिखते हुए..पर क्या करुँ हम तथाकथित महान भारतीयों का सच यही है.
हम पाषाण हृदय हो चुके है और हमारा खून पानी से भी सस्ता, तभी तो बार बार हम पर हमले होते है और हम चुपचाप कायरों की तरह
उन्हें झेलते रहते है. आखिर कौन कसूरवार है इसका ? किसे जिम्मेदार ठहरायें? क्या राज्य व केंद्र सरकारों को ? पर उन्हें तो
हम लोगों ने ही चुना है, फिर वो लोग दोषी कैसे हो सकते है.... जरा आत्ममंथन करें..दोषी हम स्वयं ही हैं...अपनी सुरक्षा के
किसी पी.चिदंबरम या आर.आर.पाटिल का इंतजार न करें, सजग बनें..समर्थ बनें..अपने आसपास किसी भी संदिग्ध को देख कर अनदेखा न
करें....कहा जाता है कि बचाव में ही बचाव है, हम डेढ़ अरब लोग अगर अपनी सुरक्षा के लिए सावचेत हो जाएं तो किसी आतंकवादी के
बाप में भी ये हिम्मत न होगी कि वो हमें छू भी सके.... रही बात देशद्रोही गद्दारों कि तो अबकि बार जब ये कुलकलंक आपके दरवाजे
पर वोटों की भीख मांगने के लिए अपना कटोरा लेकर पधारें तो इनके सम्माऩ में जूतों की आरती की विशेष व्यवस्था करें..
. सच्चरित्र बनें हो सके तो व्यवस्था परिवर्तन के लिए स्वयं आगे आएँ. आज का सत्य यही है हमें पुनः एक क्राँति की आवश्यकता है
जिसका सूत्रधार भी हमें ही बनना होगा..बहुत हो चुका, अब ...
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