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भारत विभाजन और नेहरू-गांधी का सच ।।

21.02.2016 16:13 EST
आज़ादी मिलने और विभाजन की कहानी हमारा देश कोई लड़कर आज़ाद नहीं हुआ, जो अपनी मर्ज़ी से विभाजन करता| पहले आज़ादी कैसे मिली ये पढ़ लो, फिर विभाजन की दास्तान सुनियेगा| अंग्रेज़ द्वितीय विश्व युद्ध के समय बहुत कमजोर थे, इतने कि वो जर्मनी, खासतौर पर हिटलर, के रहमोकरम कर जिन्दा थे| कमोबेश यही हालत अमेरिका का था| फ्रांस को जर्मनी पहले ही जीत चुका था| इसी समय भारत में कांग्रेस के राष्ट्राध्यक्ष सुभाष चन्द्र बोस थे| १९३९ में पुनः चुनाव से पूर्व के० एम० मुंशी और गोबिंद बल्लभ पन्त ने गांधी को अंग्रेजों की इंटेलिजेंस की फ़ाइल दिखाई थी कि सुभाष बाबू जर्मनी, इटली, रूस और जापान के नुमाइंदों से बम्बई में मिल सशस्त्र क्रान्ति और एक बड़े आन्दोलन की तैयारी कर रहे हैं| इसी समय नेताजी ने भारत में प्रोविजनल गवर्नमेंट बना बापू को इसका राष्ट्राध्यक्ष बनाने की बात रखी| मगर इतना बड़ा कदम उठाने कि कांग्रेस की औकात नहीं थी, क्यूंकि कुत्तों को घी और उल्लुओं को सूर्यप्रकाश हज़म नहीं होता| इसके खारिज होने पर सुभाष ने गाँधी को “भारत छोड़ो आन्दोलन” चलाने के लिए कहा, तब गांधी ने कहा कि अभी देश में हिम्मत नहीं है और वो ब्रिटेन की लाश पर नए भारत का निर्माण नहीं कर सकते, हमें युद्ध में अंग्रेजों का साथ देना पड़ेगा| सुभाष बाबू को गांधी ने धक्के देकर कांग्रेस से निकाल दिया और समेत बड़े भाई के उनको तीन साल के लिए बैन कर दिया| द्वितीय विश्व युद्ध का फायदा उठाने के लिए नेताजी देश से बाहर चले गए और प्रोविजनल गवर्नमेंट ऑफ़ फ्री इंडिया एवं द्वितीय आज़ाद हिन्द फौज का गठन कर मिजोरम तक पहुंचे| अफ़सोस की नेताजी का पहले प्रयास कामयाब नहीं हो पाया| युद्ध के बाद जब आज़ाद हिन्द फौज के सैनिक देश पहुंचे और प्रेस से सेंसरशिप हटी तो नेताजी के क़दमों के बारे में देश को मालूम पड़ा| कांग्रेस, गांधी, नेहरु व् पटेल की जगह आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों ने ले ली और पूरे देश में सशस्त्र क्रान्ति की लहर फ़ैल गयी| इसी समय अंग्रेजों ने कांग्रेसियों और लीगियों को लेकर “इन्टेरिम गवर्नमेंट” बनाई जिसका कार्यकाल सन 2000 तक था, आगे जाकर दोनों देशों का विभाजन होता और चुने हुए प्रतिनिधि अपना ...


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