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chootchodakblog.peperonity.net
21.02.2014 00:36 EST
काश ऐसा कोई मंज़र होता,
काश ऐसा कोई मंज़र होता,
मेरे हाथों में तेरे बूब्स,
तेरी जाँघों के बीच मेरा सर होता,
इक नशीली सी तेरे बुर की जो मादक खुशबू,
मेरे लौंड़े पे, जरा सोच क्या असर होता.
चूस कर लंड मेरा, तू भी क्या मज़ा लेती
और फिर लंड, तेरी चूत में अगर होता.
अपनी चुदाई का मज़ा भी यार मत पूछो,
सारा दिन सारी रात और दोपहर होता
मुझसे चुदती तू हर तरीके से
सारे कमरे में फचर-फचर होता
चूत और लंड बराबर झड़ते ही रहते
इनके पानी से सारा चद्दर ही गज़ब तर होता
तीन दिन चुद के जो तू आई-पिल खाती
पेट में किसी बच्चे का न कोई डर होता

chootchodak@yahoo.com


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