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शायद तुमसे, चुदने का ख़याल, दिल में आया है

24.01.2016 11:41 EST
शायद तुमसे, चुदने का ख़याल, दिल में आया है
इसीलिए, दो उँगलियों को मैंने, चूत में घुसाया है
क्या कहा? फिर से दोहराना ना?
शायद तुमसे, चुदने का ख़याल, दिल में आया है
इसीलिए, दो उँगलियों को मैंने, चूत में घुसाया है
मोटा सा लौड़ा, देख के मेरा, जाल बिछाया है
इसीलिए, दो उँगलियों को तुमने, चूत में घुसाया है
क्यों? है ना ?
नहीं-नहीं..!
ठीक तुम, चार बजे, घर चले आना
मेरी चूत, मार लेना, ज़रा न शरमाना
ठीक तुम, चार बजे, घर चले आना
मेरी चूत, मार लेना, ज़रा न शरमाना
आठ-इंची, लंड के तुम, सपने देख रही हो
कसी हुई, चूत में, ऊँगली पेल रही हो
अरे नहीं बाबा, चूत नहीं लेना
क्यों? क्यों ?
तौबा मेरी तौबा, माफ़ कर देना
इन्ही अदाओं, पर तो हाय, चूत में रस आया है
इसीलिए, दो उँगलियों को मैंने. चूत में घुसाया है
ना ना ना ना
मोटा सा लौड़ा, देख के मेरा, जाल बिछाया है
दिल्लगी, ना करो, चोदो न हमको सनम
लंड पे अपने, कंडोम लगा लो, तुमको मेरी क़सम
दिल्लगी ना करो, चोदो न हमको सनम
लंड पे अपने, कंडोम लगा लो, तुमको मेरी क़सम
जान-ए-मन, ये माना हम, सबकी लेते हैं
चोदना तो ठीक है, पर कंडोम से चिढ़ते हैं
कंडोम के बिना, सब कुछ, बड़ा अच्छा लगता है
कंडोम लगा करके, सब बेकार लगता है
इन्ही अदाओं, पर तो हाय, चूत में रस आया है
इसीलिए, दो उँगलियों को मैंने. चूत में घुसाया है
ओ, मोटा सा लौड़ा, देख के मेरा, जाल बिछाया है
तुम्हे मेरी क़सम चोदोगे ना?
नहीं..बिलकुल..नहीं!
हाँ तेरी क़सम, चोदूँगा, और रगड़ के चोदूँगा !!
© chootchodak@yahoo.com


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