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छर-छर करके निकल रही थी, चूत से मूत की धारा

23.05.2016 13:27 EDT
टिम्बक टारा टिम्बक टारा
भानुमती का खुला पिटारा
छर-छर करके निकल रही थी
चूत से मूत की धारा
नंगी चूत देख कर चढ़ गया
मेरे लंड का पारा
अच्छा ख़ासा सोया था
मुँह ढँक कर लंड बेचारा
खड़ा हो गया झटके खाकर
फिर तो मेरे यारा
लंड सुपाड़ा फूल गया
बन गया वो आलूबुखारा
चोद रखी हैं ढेरों चूतें
मेरा लंड न कोई कुँवारा
बड़े दिनों के बाद चमका था
उसकी किस्मत का तारा
सट गया चूत से झट से जाकर
जोर का धक्का मारा
अन्दर तक घुस गया चूत में
वो सारा का सारा
दिख गया चूत को इस हमले से
भरी दुपहरी तारा
जोर-जोर से मारा लंड ने
फिर धीरे-धीरे मारा
धीरे-धीरे मार के फिर से
बड़ी जोर से मारा
कभी कभी तो बाहर आकर
पूरा अन्दर मारा
आने लगा मज़ा चूत को भी
तो उठा-उठा के मारा
सीने से दब-दब कर फूली
चूची बनी गुबारा
बहते-बहते साथ में आखिर
दिखने लगा किनारा
तेज हो गयी रगड़-घिसाई
निकला माल हमारा
लंड चूत का खेल न कोई
जीता कोई हारा
“मिले जो मौका करो चुदाई”
यही हमारा नारा!!
© chootchodak@yahoo.com


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