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जरा जरा, मचलता है, फड़कता है, आज तो मेरा, लंड मगन

24.12.2016 13:27 EST
जरा जरा, मचलता है, फड़कता है, आज तो मेरा, लंड मगन
तू प्यासी है, तुझे भर के, अपनी बाहों में
जरा जरा, मचलता है, फड़कता है, आज तो मेरा, लंड मगन
तू प्यासी है, तुझे भर के, अपनी बाहों में
हाय चोदूँगा, तुझको सनम, दूर कहीं ना जा
अपनी चड्ढी, खोल दे तू, पास मेरे आजा रे

यूँ ही रगड़-रगड़, चूत लंड बरसें
ये चादर, भींग जाएँ, इस चुदाई की, बारिश में
मेरे चुदासे लंड को सहलाये, तू अपनी, उँगलियों से
मैं तो हूँ इसी ख्वाहिश में
सर्दी की, रातों में, हम चोदते रहें, डबल बेड पे
हम दोनों नंगे हों, ना कोई भी रहे, इस घर में
जरा जरा, मचलता है, फड़कता है, आज तो मेरा, लंड मगन
तू प्यासी है, तुझे भर के, अपनी बाहों में
आजा रे, आ रे

तड़पायें तुझे, लंड के मेरे, हर झटके
एक बार में, पूरा डालूँ, खींच लूँ, कभी बाहर
फिर मोड़ दूँ, उठा कर तेरी गोरी लातें
बेचैन करके तुझको, चोदूँ पकड़े, तेरी कमर
कभी चढ़ कर, कभी तुझको, खुद पे लिटा कर
लंड के बिना, चूत का कर दूँ जीना मुश्किल, रात भर
जरा जरा, मचलता है, फड़कता है, आज तो मेरा, लंड मगन
तू प्यासी है, तुझे भर के, अपनी बाहों में
हाय चोदूँगा, तुझको सनम, दूर कहीं ना जा
अपनी चड्ढी, खोल दे तू, पास मेरे आजा रे
आजा रे..आजा रे..आजा

© chootchodak@yahoo.com


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