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तथाकथित हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि धर्म हमें संकीर्ण बनाते हैं, मानव मानव में भेद करना सिखाते हैं,सीमाओं में सीमित करते हैं, आडम्बरों के लिए बाध्य कर... Read more
यदि किसी अधेड़ व्यक्ति को सच्चाई का पता चले कि उसकी माँ वास्तव में उसकी माँ नहीं है, किसी बच्चा-चोर स्त्री ने मनगढ़ंत कहानी बनाकर उसको उसकी बाँझ माँ ... Read more
संसार में यदि सुख-शांति स्थापित करना है तो यथार्थ धर्म अर्थात् मानवता को मन, वचन, कर्म से अपनाना होगा तथा तथाकथित धर्म अर्थात् हिंदू, मुस्लिम, सिख,... Read more
प्रेम, परोपकार, करुणा, दया, सेवा आदि मानवता के गुण हैं। मानवता धर्म है। मानवता से अर्थात् प्रेम आदि मानवीय गुणों से मनुष्य तो मनुष्य, पशु-पक्षी भी ... Read more
धर्म सदा जोड़ता है, तोड़ता नहीं। अब सोचिए - हिंदू ने मुस्लिम को जोड़ा या ईसाई को, मुस्लिम ने ईसाई को जोड़ा या जैन को? उत्तर है - इन्होंने जोड़ा कहाँ? ये... Read more
गीता का एक श्लोक है 'यदा यदा हि धर्मस्य....' जिसका अर्थ है 'जब जब धर्म की हानि होती है....' यहाँ किस धर्म की बात कही गई है? हिंदू की या मुस्लिम की,... Read more
यह तो आपने कहा या सुना होगा कि भूखे निर्धन को भोजन कराना धर्म है, पुण्य है, मानवता है किंतु यह कभी नहीं कहा या सुना होगा कि भूखे निर्धन को भोजन करा... Read more
जब कोई प्यासे को पानी पिलाता है या भूखे को भोजन कराता है तब कहा जाता है कि उसने पुण्य का कार्य किया, उसने धर्म का कार्य किया। इससे यह सिद्ध हुआ कि ... Read more
विचार कीजिए। दया करे तो दयालु, सेवा करे तो सेवक, दान करे तो दानी हुआ। अब तथाकथित धर्म के विषय में समझें। तथाकथित धर्म और उस धर्म का अनुयायी, सदा सम... Read more
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