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·:·♠सीख जिन्दगी की♠·:· ◆◆◆◆◆◆◆◆

14.01.2017 09:07 EST
एक राजा का जन्मदिन था.
सुबह जब वह घूमने निकला तो उसने तय किया कि वह रास्ते मे मिलने वाले सबसे पहले व्यक्ति को आज पूरी तरह से खुश और सन्तुष्ट करेगा.
उसे एक भिखारी मिला.
भिखारी ने राजा से भीख मांगी तो राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया.
सिक्का भिखारी के हाथ से छूटकर नाली मे जा गिरा.
भिखारी नाली मे हाथ डालकर तांबे का सिक्का ढूढ़ने लगा.
राजा ने उसे बुलाकर दूसरा तांबे का सिक्का दे दिया.
भिखारी ने खुश होकर वह सिक्का अपनी जेब मे रख लिया और वापस जाकर नाली मे गिरा सिक्का ढूढ़ने लगा|
राजा को लगा कि भिखारी बहुत गरीब है.
उसने भिखारी को फिर बुलाया और चाँदी का एक सिक्का दिया.
भिखारी ने राजा की जय जयकार करते हुए चाँदी का सिक्का रख लिया और फिर नाली मे तांबे वाला सिक्का ढूढ़ने लगा.
राजा ने उसे फिर बुलाया और अब भिखारी को एक सोने का सिक्का दिया.
भिखारी खुशी से झूम उठा और वापस भागकर अपना हाथ नाली की तरफ बढ़ाने लगा.
राजा को बहुत बुरा लगा.
उसे खुद से तय की गयी बात याद आ गयी कि पहले मिलने वाले व्यक्ति को आज खुश एवम् संतुष्ट करना है|
उसने भिखारी को फिर से बुलाया और कहा कि मै तुम्हे अपना आधा राज..पाट देता हूं.
अबतो खुश और संतुष्ट हो जाओ.
भिखारी बोला, "सरकार मै तो खुश और संतुष्ट तभी हो सकूंगा, जब नाली मे गिरा हुआ ताँबे का सिक्का भी मुझे मिल जाएगा|"
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हमारा हाल भी उस भिखारी जैसा ही है.
हमे परमात्मा ने मानव रूपी अनमोल खजाना दिया है और हम उसे भूलकर संसार रूपी नाली मे ताँबे के सिक्के निकालने के लिए जीवन गंवाने जा रहे हैँ.
इस अनमोल मानव जीवन का हम सही इस्तेमाल करेँ, तो हमारा जीवन धन्य हो जाएगा|
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thanks!!!


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