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First chudai

10.10.2014 01:39 EDT
नाम ज्योत्सना है, मैं 32 साल की शादीशुदा महिला हूँ।
मैं और राजू बचपन के दोस्त हैं। हम स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ पढ़े।
मेरा घर और उसका घर आमने सामने में था। राजू बहुत ही सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक है। मेरा दिल उस पर शुरू से ही था।
मैं उस से कभी कभी सेक्सी मजाक भी कर लेती थी। वो भी इशारों में कुछ बोलता था जो मुझे समझ में नहीं आता था।
राजू भी मुझ पर मरता था, यह मैं जानती थी।
सन 2001 में मैं फाइनल इयर में थी, जुलाई का महीना था, पापा के ऑफिस चले जाने के बाद मम्मी मेरी छोटी बहन प्रीति को कॉलेज में एडमिशन कराने चली गई, मैं घर पर अकेली थी, टीवी पर रंगीला फिल्म देख रही थी और कुछ सेक्सी मूड बन रहा था।
तभी राजू का ख्याल आया, मैंने खिड़की से देखा, वह अपने दरवाजे पर खड़ा होकर बारिश का आनन्द ले रहा है।
मैंने उसे हाथ दिखा कर उसे बुलाया और कहा- काम वाली बाई नहीं आई है अभी तक!
उसने कहा- क्या मैं तुम्हारा काम कर दूँ और हंसने लगा।
फिर हम दोनों साथ बैठ कर बातें करने लगे और रंगीला फिल्म भी देखने लगे।
फिल्म देखते देखते मैंने राजू की तरफ़ एक बार प्यार भरी नज़र से देखा।
वो भी मुझे देख कर और पास आने लगा।
आँखों आँखों में इशारे होने लगे, फ़िर उसने मुझे अपनी बाहों में लिया… और मैं उसकी बाहों में खिंचती चली गई।
उसने धीरे से कहा- ज्योत्स्ना… अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है।
उसने अपने होंठ मेरे नर्म नर्म होंठों पर रख दिए, उसके होंठ भी नर्म नर्म थे।
वो मेरे होंठ चूसने लगा।
मैंने अपनी अदाएँ भी दिखानी शुरू कर दी, मैंने कहा- यह क्या कर रहे हो ! राजू ! मुझे छोड़ो ना…! मुझे डर लग रहा है, कोई आ जाये ग़ा…
मेरी बात अनसुनी करके उसने अपनी बाहें मेरी कमर में डाल कर मेरी चूतड़ों की दोनों गोलाइयों को पकड़ लिया और जोर जोर से दबाने लगा।
‘आह… नहीं… नहीं करो…बस करो अब… सी स्स… बस राजू…!’
मैं मुड़ कर जाने लगी तो फ़िर पीछे से खींच लिया… और मेरी नाइटी उठा कर कमर से कस लिया… उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों पर आ गए और उनको मसलने लगे।
उसका कड़क लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा जा रहा था। मैं काम-पिपासा से जल उठी। मेरी पैन्टी तो नहीं के बराबर थी।
उसके लण्ड क स्पर्श चूतड़ों में बड़ा आनन्द दे रहा था।
उसके हाथ मेरे कठोर अनछुए स्तनों को सहला रहे थे, बीच बीच में मेरे चूचकों को भी मसल देते थे और खींच देते ...
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