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पईथागोरस थेओरम !

06.04.2014 05:42 EDT
एक प्रमेय होती है जिसका हम नवमी-दसमी से लेकरबारह्वी कक्षा तक प्रयोग करते हैं, जिसे हम पईथागोरसथेओरम कहते हैं| पईथागोरस का जन्म हुआ ईशा से आठशताब्दी पहले और ईशा के पंद्रहवी शताब्दी पहले केभारत के गुरुकुलों के रिकार्ड्स बताते हैं कि वो प्रमेयहमारे यहाँ था, उसको हम बोधायन प्रमेय के रूप में पढ़तेथे|बोधायन एक महिर्षि हुए उनके नाम से भारत में ये प्रमेयईशा के जन्म के पंद्रहवी शताब्दी पहले पढाईजाती थी यानि आज से लगभग साढ़े तीन हज़ार साल पहलेभारत में वो प्रमेय पढाई जाती थी, बोधायन प्रमेय केनाम से और वो प्रमेय है - किसी आयत के विकर्णद्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाईद्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबरहोता है। तो ये प्रमेय महिर्षि बोधायन की देन है जिसेहम आज भी पढ़ते हैं और पईथागोरस ने बेईमानी करके उसेअपने नाम से प्रकाशित करवा लिया है औरसारी दुनिया आजतक भ्रम में है |--------------- --------------- ------------------------------ --------------- --------------- ---शुल्ब सूत्र या शुल्बसूत्र संस्कृत के सूत्रग्रन्थ हैं जो स्रौतकर्मों से सम्बन्धित हैं। इनमें यज्ञ-वेदी की रचना सेसम्बन्धित ज्यामितीय ज्ञान दिया हुआ है। संस्कृत कें शुल्बशब्द का अर्थ नापने की रस्सी या डोरी होता है। अपनेनाम के अनुसार शुल्ब सूत्रों में यज्ञ-वेदियों को नापना,उनके लिए स्थान का चुनना तथा उनके निर्माणआदि विषयों का विस्तृत वर्णन है। ये भारतीयज्यामिति के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं।शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, वेदों केउपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित केसम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं।--------------- --------------- ------------------------------ --------------- --------------- -शुल्बसूत्रों में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीनमाना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से८०० ईसा पूर्व माना गया है।अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियमदिया है-दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाया रज्जुः पार्च्च्वमानी तिर्यङ्मानीच |यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ||एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता हैजितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं।यहीं तो पाइथागोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इसप्रमेय की जानकारी भारतीयगणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल ...


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