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░‎‎♥namaz me shafa.hindi♥░

नमाज मेँ शिफा
अल्लाह के रसूलने फर्माया बिला शुब्हा नमाज मे शिफ है (इब्न माजा) नमाज तमाम रुहानी और जिस्मानी आरजोँ को शिफा देती है ।
यहाँ हम पाकिस्तान के मशहूर (दिल की बीमारियोँ के) इलाजकार डाo मुo आलमगीर खां साहब के जांच का खुलासा पेश करते है जिससे हूजूरके इर्शादात गरामी की तशरीह होती है और तशरीह इस एतबार से कि उनके किसी बात मेँ साबित करने की जरुरत नहीँ और तशरीह जिस कदर करें कम है ।
अल्लाह तआला हम पर पाँच वकत की नमाज फर्ज करके हम पर बड़ा एहसान फर्माया है नमाज एक तरफ रुहानी उरुज अता करती है और बुराइयोँ से निकाल कर पाकीजगी बख्शती है दूसरी तरफ जिस्मानी सेहत के लिए हद दर्जे सेहत देने वाली है ।
1 . उम्र के साथ साथ कोलिस्ट्रोल (CHOLESTEROL) चर्बी से शिर्यानी तंग से तंग हो जाती है और इनकी तंगी से बेशूमार आरजे (बिमारिया) पैदा होते है जैसे डाइबीटीज, बलड, प्रेसर, फालिज, दिल की बीमारी, बुढापा, हाजमे की बीमारियां वगैरह ।
इस चर्बी को (जयादती) फरावानी का बेहतरीन इलाज वर्जिश (कसरत करना) मेँ है । जो नामाज से अचछी तरह पूरा हो जाता है चुनांचे नमाजी लोगोँ को और मेहनत करने वाले के मुकाबले यह बीमारी कम पकडती है ।
2 . गौर करे तो नमाज की तरतीब भी एसी है कि जब पेट खाली होता है तो रकआत की तादाद भी कम होती है जैसे फजर असर और मगरिब मे मगर खाने के बाद जोहर और इशा की रकआत जयादा है कयोकी खाने के बाद चर्बी की जयादती हो जाती है रमजानुल मुबारक मे मगरिब मे इफतारी मे जयादा खाया जाता है तो इश मे तरावीह की रकआत बढी रहती है इस तरह नमाज रुहानी बरकतो के साथ साथ एक जिस्मानी कसरत भी है और खून गाढ़ा न होने का कारण बन जाता है ।
3 . अगर हम नमाज हुजुर अकरमके इर्शाद के मुताबिक अमल करे तो जिस्म का कोइ हिस्सा ऐसा नही की वरजिश अपने आप अच्छे तरीके से न हो जाती हो ।
तकबीर उला- नीयत बांधने लिये केहुनी के तमाम हिस्से और कांधे के जोड़ हिस्सा लेते है जिससे खून का दौरान खूद ब खूद तेज हो जाता है ।
अकामत- अकामत मे हाथ बांधने से केहुनी और कलाई के आगे पीछे वाले अंग हिस्से लेते है और खून का दौरान तेज करते है ।
रुकूअ- रुकूअ मे कूलहे, घूटने, टखने और केहुनियो पर झुकाव होता है टांगो, रानो, कमर और पेट के हिस्से खिचे हुए होते है । औरतो के घुटने सज्दे मे छाती से लगे होते है जिस्से उनके खास अन्दरुनी आर्जो मे कमी होती है । ...


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