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(ऐरसूल)क्यातुमने(उलमाएयहूद)केहालपरनज़रनहींकीजिनकोकिताब(तौरेत)काएकहिस्सादियागयाथा(अब)उनकोकिताबेख़ुदाकीतरफ़बुलायाजाताहैताकिवही(किताब)उनकेझगड़ेंकाफैसलाकरदेइसपरभीउनमेंकाएकगिरोहमुंहफेरलेताहैऔरयहीलोगरूगरदानी(मुँहफेरने)करनेवालेहैंयेइसवजहसेहैकिवहलोगकहतेहैंकिहमेंगिनतीकेचन्ददिनोंकेसिवाजहन्नुमकीआगहरगिज़छुएगीभीतोनहींजोइफ़तेरापरदाज़ीयेलोगबराबरकरतेआएहैंउसीनेउन्हेंउनकेदीनमेंभीधोखादियाहैफ़िरउनकीक्यागतहोगीजबहमउनकोएकदिन(क़यामत)जिसकेआनेमेंकोईशुबहानहींइक्ट्ठाकरेंगेऔरहरशख्सकोउसकेकिएकापूरापूराबदलादियाजाएगाऔरउनकीकिसीतरहहक़तल्फ़ीनहींकीजाएगी(ऐरसूल)तुमतोयहदुआमॉगोंकिऐख़ुदातमामआलमकेमालिकतूहीजिसकोचाहेसल्तनतदेऔरजिससेचाहेसल्तनतछीनलेऔरतूहीजिसकोचाहेइज्ज़तदेऔरजिसेचाहेज़िल्लतदेहरतरहकीभलाईतेरेहीहाथमेंहैबेशकतूहीहरचीज़परक़ादिरहैतूहीरातको(बढ़ाके)दिनमेंदाख़िलकरदेताहै(तो)रातबढ़जातीहैऔरतूहीदिनको(बढ़ाके)रातमेंदाख़िलकरताहै(तो... Continue Reading
(ऐ रसूल) क्या तुमने (उलमाए यहूद) के हाल पर नज़र नहीं की जिनको किताब (तौरेत) का एक हिस्सा दिया गया था (अब) उनको किताबे ख़ुदा की तरफ़ बुलाया जाता है ताकि वही (किताब) उनके झगड़ें का फैसला कर दे इस पर भी उनमें का एक गिरोह मुंह फेर लेता है और यही लोग रूगरदानी (मुँह फेरने) करने वाले हैं ये इस वजह से है कि वह लोग कहते हैं कि हमें गिनती के चन्द दिनों के सिवा जहन्नुम की आग हरगिज़ छुएगी भी तो नहीं जो इफ़तेरा परदाज़ी ये लोग बराबर करते आए हैं उसी ने उन्हें उनके दीन में भी धोखा दिया है फ़िर उनकी क्या गत होगी जब हम उनको एक दिन (क़यामत) जिसके आने में कोई शुबहा नहीं इक्ट्ठा करेंगे और हर शख्स को उसके किए का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मॉगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है तू ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर देता है (तो) रात बढ़ जाती है और तू ही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है) तू ही ...


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