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1. गुनाहे शगीरा (छोटे-छोटे गुनाह)
2. गुनाहे कबीरा (बड़े-बड़े गुनाह) गुनाह शगीरा अच्छे आमाल, और इबादतों की बरक़त से माफ हो जाते हैं, लेकिन गुनाहे क़बीरा उस वक्त तक माफ नही होते जब तक सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह से उनके हुक़ूक को माफ नहीं कराले।
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गुनाह कबीरा हर उस गुनाह को कहते है जिसमें खुदा की तरफ से अजाब मुकरर्र किए गए हैं। जैसे शिर्क करना, जादू करना, बिना वज़ह किसी का ख़ून करना, सूद खाना, किसी यतीम का माल खाना, चोरी,शराब, झूठी गवाही देना, झूठ बोलना, माँ-बाप को तकलीफ देना, किसी पर जुल्म करना, जुआ खेलना, अल्लाह की रहमत से मायुस होना, अल्लाह के अजाब से बेखौफ हो जाना, नाच देखना, औरतों को बेपर्दा घुमना, नाप तौल में कमी करना, चुगली खाना, किसी की बुराई करना, मुसलमानों को आपस में लड़ाना, किसी की अमानत में ख़यानत करना, नमाज़, रोज़ा, हज व ज़कात आदि छोड़ देना, व्यभिचार करना ऐसे सैंकड़ों गुनाहे कबीरा में आते हैं जिनसे बचना हर मुसलमान औरत और मर्द परफर्ज है। गुनाहों की वज़ह से दुनिया में भी नुकसान गुनाहों की वज़ह से आखिरत में अजाब तो मिलते ही है पर दुनिया में भी नुकसान पहुंचते रहते हैं। रोज़ी कम हो जाना, उम्र घट जाना, शारीरिक कमजोरी आना, सेहत खराब रहना, इबादतों से महरुम हो जाना, लोगो की नजरमें ज़लील होना, नेमतों का छिन जाना, लाइलाज बीमारियाँ होना, चेहरे से ईमानका नूर निकल जाने से चेहरा बेरौनक हो जाना। हर तरफ जिल्लत, रुसवाईयों का मिलना, मरते वक्त मुंह से कलमा न निकलना। ऐसे गुनाहो से बड़े - बड़े नुकसान हुआ करते है।


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