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♦ परीचय : अहलेसुन्नत वल-जमाअत

[Islam-in-Hindi.peperonity.net]

आल्‍लाह तआला का बेहद-व-हिसाब शुक्र-व-अहसान है कि उसने हमें अपने प्‍यारे महबुब हुजूर नबी-ए-अक्रम सल्‍लल्‍लाहु अलैही व-सल्‍लम का उम्‍मती बनाया और सच्‍चा मसलक (रास्‍ता) मसलक-ए-अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत नसीब फरमाया.

बेहद्दो हिसाब दुरूद हों हमारे प्‍यारे आकॉं हुजूर नबी-ए-अक्रम नुर-ए-मुजस्‍सम शफि-ए-मुअज्‍ज्‍म सल्‍लल्‍लाहु अलैही व-सल्‍लम पर जिनके सद्के सबकुछ पैदा किया गया.

• अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत के बुनयादी (अहम) अकाईद:

इस्‍लाम के जो बुनयादी अकाईद हैं वहीं दरअस्‍ल अहलेसुन्‍नत व-जमात के बुनयादी अकाईद हैं फिर जैसे जैसे हालात बदल्‍ते रहें नये नये गुमराह फिर्के पैदा होते रहें और उनकी पहचान-व-शनाख्‍त और तरीके बदल्‍ते रहें.

मौसुअत उल-लुद्यान नामी किताब में अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत कि तारीफ इस तरह कि है कि..

'' अहलेसुन्‍नत व-जमात वही हैं जोर सुलआल्‍लाह सल्‍लल्‍लाहु तआला अलैही व-सल्‍लम कि सुन्‍नत पर अमल पैरा रहें, बदमज़हबों कि गुमराहीयों से किनारा कश (दुर) रहें और जमाअत से वाबस्‍ता रहें, जमाअत से मुराद (यानी इसका मतलब) सहाबा-ए-किराम अलैहीमुर्रीद्वान हैं ''

अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत का लफ्ज़ अहादीस से माखुज़ है लेकिन बदमज़हबों के मुकाबले में यह नाम साहाबा के दौर के बाद शुरू हुवा [यानी जिस वक्‍त बदमज़हब, गुमराह लोगों कि तादाद बढने लगी तो इस नाम 'अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत' का इस्‍तेमाल किया गया] बाद में इस्‍लामी नज़री यात के दो गिरोह वजुद में आयें..

1] अशअरी और
2] मातुरदी,

लेकिन दोनों में फिरवी इख्‍तेलाफात होने के बा वजुद (यानी वह मसाइल जो ज़रूरीयाते दीन मेंसे नही थें) दोनों उसुली मसाईल में मुत्‍तफिक थें (यानी ज़रूरीयातेदीन के मसाईल में सही अकाईद रख्‍ते थे) इस लिए दोनों अहलेहक और अहलेसुन्‍नत वल-जमाअत से मशहुर हुये, अहदे ताबईन में भी अहादीस कि रिवायत को कुबुल-व-मंजुर करने के लिए भी देखा जाता था कि अहलेसुन्‍नत व-जमात है या नही.

हज़रत इमाम मुस्लिम (जो हदीस कि मुस्‍तनद किताब सहीह मुस्लिम शरीफ के लेखक है) अपनी सहीह के मुकद्दमे में इमाम मुहम्‍मद बिन-सिरीन ताबई से बा-सनद खद रिवायत करतें है (यानी कहते हैं)..

'' पहले अस्‍नाद (रिवायत करने वालों) के तआल्‍लुक से तफतीश नही होती थी, लेकिन जब कित्‍ना बर्पा हुवा तो रिवायत करते वक्‍त कहतें अपने रावियों (रिवायत करनेवालों) के बारे में बताइयों, तो अगर अहलेसुन्‍नत व-जमात देख्‍ते तो कुबुल कर लेते और ...
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