peperonity.net
Welcome, guest. You are not logged in.
Log in or join for free!
 
Stay logged in
Forgot login details?

Login
Stay logged in

For free!
Get started!

Text page


bipin.chaudhary.peperonity.net

•••DOST KI SUHAGRAAT•••

Disclaimer - all the characters & incidents in this story are fictitious & any resemblance to living

मेरे जिगरी दोस्त डाबा के बारे में आप सभी अच्छी तरह से वाकिफ होंगे ही पहले की कथाओ के ज़रिये सो मैं ज्यादा समय व्यर्थ नही करूँगा उनके introduction में और सीधे घटनाक्रम पर आऊंगा।
काफी प्रयात्नोके पश्चात् अंततः उसकी शादी हो ही गई। सभी अत्यंत खुश थे ,डाबा भी जी की स्वाभाविक था। आखिर इतने वर्षों से जिस काम की तमन्ना हर जवान लड़के को रहती है वह उसे आज रात करने वाला था
विदाई के बाद भाभी घर आ गई थी जिसका डाबा को वर्षों से इंतजार था। उसके मन में था कि कब ये दिन ढले और रात आये। पर अपनी यह बेचैनी उसको पिताजी और भैया से छुपानी भी पड़ रहीथी।

उसको ऐसा व्यव्हार करना पड़ रहा था जैसे उसको कोई उतावलापन नही है। दिन में तो घर परिवार की महिलाओ का ही कब्जा था इनके शयन कक्ष में ,तो ये उधर जाने का तो सोच भी नही सकते थे। अन्यथा इनको उन सभी के मजाक का सामना करना पड़ जाता।

सो डाबा व्यर्थ के कामो में खुद को व्यस्त दिखाने की असफल कोशिश कर रहे थे
गेंदे के पौधों को पानी देना (यह काम उन्होंने जीवन में पहले कभी न किया था)

दूर से पिताजी उसको देख कर हैरत में भी थे और मुस्कुरा भी रहे थे। वह उसकी मनःस्थिति से भलीभांति परिचित थे।
धीरे धीरे सूर्यास्त होने लगा। दाब भाई के अंतर्मन में वो सभी विडियो लगातार चल रहे थे जो उसने मुझसे उनकीमोबाइल में उन्होंने ब्लूटूथ से लिए थे।

अब तो रात का भोजन भी हो गया था। डाबा रोटी को कुछ ज्यादा ही चबा कर खा रहे थे न जाने क्या समझ कर।
भैया इनको देख कर बोले -"सबर करब्या त जबर मिली"
डाबा सुन के झंड महसूस करने लगे और मुह नीचे किये हुए ही खाना ख़त्म कर दिया।

अब तक रिश्तेदारों की भीड़ छंट चुकी थी। पर डाबा अभी भी पिताजी और भैया से तमाम बातो में लगे थे । वह उस दुकान की बात कर रहे थे जो शीघ्र ही खुलनेवाली थी। पिताजी तो समझ ही रहे थे की डाबा को संकोच हो रहा हो और भैया भी नावाकिफ न थे स्थिति से।
--------------
पिताजी ने तो नींद आने का बहाना किया और खिसक लिए वहां से।
भैया भी कुछ देर तक ही इनकी बकवास झेल पाए।
फिर झल्ला कर बोले- "जा सारे सोवै, तैं त ऐसे लजात बाटे जैसे तहिन ही दुल्हिन बाटे।"
यह कहकर वह भी सोने चले गए
-----------------

डाबा अब ऐसा महसूस कर रहे थेकि कोई खज़ाना उनके सामने खुला पड़ा है और उसके पहरेदार उसकी रखवाली करने की ज़िम्मेदारी इनपे ही छोड़ कर गए हैं। अब तो खुली लूट और छूट थी उनके लिए। मन ही मन फूले न समा रहे ...
Next part ►


This page:




Help/FAQ | Terms | Imprint
Home People Pictures Videos Sites Blogs Chat
Top
.