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Zindagi

मजबूत इरादें



उम्मीदें टूटती हैं और टूटते हो तुम

तमस की गहरी खाई में हो जाते हो गुम

इसीलिए कहता हूँ कोरी उम्मीदें मत बांधों

उठो अभी साहस है तुममे दुनिया को दिखला दो

अपनी राहें आप बनाना ये सब तुमने सीखा है

आखिर इसके माली हो तुम ये जो बागीचा है

किस सोच के भंवर में नैया फाँसी तुम्हारी है

मुख पर छाई कालिमा ये कैसी लगी बीमारी है

इक उम्मीद टूटने से क्यूं मायूस हुए जाते हो

जीवन के समुंदर में छोटी नदियों की तरह खो जाते हो

ये वक्त नहीं मायूसी का अब इसका दामन तुम छोडो

बढ जाये मार्ग पर कदम तुम्हारे और शिखर को तुम छूलो

अपने साहस का परचम तुम नीलगगन में लहरा दो
हैं अब भी मजबूत इरादें तुम सारी दुनिया से कह दो.......


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