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गवार से अमीरी!

भारत के पश्चिमी इलाकों के रेगिस्तान में इन दिनों गवार फली उगाने वाले किसानों, इसका व्यापार करने वालों के पास पैसे कमाने का शानदार मौका है. अमेरिका खरीद रहा है भारत का ग्वार.
अमेरिका में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि तेल उद्योग को इसकी जरूरत है. जोधपुर, राजस्थान में ग्वार पॉवडर का व्यापार करने वाली कंपनी भंसाली इंटरनेशल के जीतेश भंसाली नेडॉयचे वेले से बातचीत में बताया कि "पिछले डेढ़ साल में इस उत्पाद की मांग पांच गुना ज्यादा बढ़ी है."कारण है शेल गैस, यानी पत्थरों केबीच से मिलने वाली गैस का बढ़ता उपयोग.
अमेरिकी कंपनियां जो पत्थरों के बीच से तेल और ऊर्जा निकालने के काम में लगी हुई हैं उन्हें ग्वार याक्लस्टर बीन थोकमें चाहिए. इस मांग ने उन छोटे किसानों की चांदी कर दी है जो दुनिया की अस्सी फीसदी गवार उगाते हैं. राजस्थान की रेतीली जमीन मेंगवार उगाने वालेकिसान शिवलाल कहते हैं, "गवार ने मेरी दुनिया बदल दी है. अब मेरा घर पक्का है और मेरे पास कलर टीवी भी है. अगले साल मैं छत पर भी गवार उगाने की कोशिश करूंगा." गवार सेउन्हें इतना फायदा हुआ कि उनकी सालाना आय पांच गुना बढ़ कर तीन लाख रुपये हो गई. गवार का गोंद सॉस और आइसक्रीमबनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसे जमीन से गैस निकालने के हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग तरीके में इस्तेमाल किया जाता है.
फ्रैंकिंग तकनीक को ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी तकनीक बताया जा रहा है. एक ऐसी तकनीक जो ऊर्जा का भूराजनीतिक नक्शा बदल देंगी. उत्तरी अमेरिका में गैससप्लाई बढ़ जाएगी.
इस तकनीक में चाहिए गवार गोंद(गवार गम). इस कारण अब इसे काला सोना कहा जाने लगा है. जोधपुर में गवारके बीज 305 रुपयाकिलो बिक रहे हैं. यह कीमत साल भर पहले से 10 गुना ज्यादा है. सूर्यनगरी में 11 साल से गवार का पॉवडर बेच रही कंपनी भंसाली इंटरनेशनल के जीतेश भंसाली नेहमें बताया कि"डेढ़ साल के अंदर उनके उत्पादों की मांग पांच गुना बढ़ी है. साल भर पहले एक टन गवार पॉवडर की कीमत 15-20 लाख रूपये थी वहीं अब इसकी कीमत ढाई करोड़ प्रति टन हो गई है."
टेक्सास में वेस्ट गवार टेक्सास के वेड कोवान कहते हैं,"दुनिया ने कभी नहीं सोचा था कि उसे गवार की इतनी ज्यादा जरूरत होगी."
भारत में करीब 10लाख टन गवार सालाना पैदा होती है. उसने 2011 में ...
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