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kamini jindal
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सुश्री कामिनी जिँदल


बेटी बनी 'प्रेरणा'

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kamini@dainikbhaskargroup.com

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श्रीगंगानगर के नोजगे पब्लिक स्कूल से वर्ष 2006 में 12वीं उतीर्ण सुश्रीकामिनी जिन्दल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, देहली से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं और इस समय पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ से 'भारतीय किसानों की चिंताजनकस्थिति और आत्महत्याएं' तथा पर्यावरण विषय पर पीएचडी कर रही हैं। इस लेख में सुश्री कामिनी जिन्दल द्वारा अब तक की गई शोध पर आधारित जानकारियां पाठकों के लिए प्रस्तुत की गई हैं।

शीतलहर और तेज लू के थपेड़े सहते हुए कड़कती आसमानी बिजलीऔर झमाझम बारिश में अपने तन से बेपरवाह और मिट्टी के साथ मिट्टी होते हुए किसान को आज भी विश्वव्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की ओर से घोषित फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा। यहां तक कि उसे उसकी लागत का भी केवल 70 प्रतिशत मूल्य ही दिया जा रहा है। यह कहना है उद्योगपति एवं समाजसेवी और किसानों के हितैषी बी.डी. अग्रवाल का। उनका कहना है कि उनकीबेटी कामिनी जिंदल ने किसानों की समस्याओं पर स्टडी करते हुए उन्हें यह बताया कि खेती के लिएअपना सर्वस्व न्यौछावर करने के बाद भी देश के नीति निर्माता किसान को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। किसान को डब्ल्यूटीओ की ओर से घोषित समर्थन मूल्य भी नहीं दिया जा रहा।उन्होंने कहा कि यह विडम्बना नहीं तो और क्या है कि किसान संगठनों द्वारा किसानों की तरक्की व आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किए जा रहे ढपोरशंखी साबित हो रहे हैं। संगठनों की मांगे बेशक वाजिब होती हैं,लेकिन उन्हें मनवानेके प्रयास राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित होते हैं। किसान को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उसे मुफ्त बिजली-पानी देने के नारे देकर सत्ता हथियाने का माध्यम बना लिया गया है।

अपनी लाडली के माध्यम से किसानों की समस्याओं से गहराई से परिचित होने के बाद गत वर्षों में धरतीपुत्रों की दशा-दिशा सुधारने में प्रयासरत बी.डी. अग्रवाल का कहना है कि उनकी बेटी कामिनी ने ही उन्हें बताया कि यदि महंगाई को देखते हुए श्रम व किसानों की ओर से फलसउत्पादन में झौंके जा रहे साधन-संसाधन ...


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