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दहेज कानूनों की मार खाते पुरुष !

भारत की छवि आज भी दुनिया के सामने एक पुरुष प्रधान समाज की है. देश में महिलाओं को बराबरी के हक दिलाने की लगातार कोशिश होती आई है, लेकिन कई बार इनका इस्तेमाल महिलाओं के हक में कम और पुरुषों के खिलाफ ज्यादा होता है.
कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए का सबसे अधिक गलत इस्तेमाल किया जाता है. तीस साल पहले इस धारा में बदलाव किए गए थे ताकि विवाहित महिलाओं को उत्पीडन से बचाया जा सके. उस समय देश में दहेज के मामले तेजी से बढ़ रहे थे और उनका नतीजा लड़कियों के कत्ल या खदकुशी के रूप में दिख रहा था.
दहेज के खिलाफ कानून के कड़े होने से हालात कुछ सुधरे. हालांकि तीस सालबाद भी दहेज नाम का अभिशाप समाज से दूर नहीं हो पाया है. लेकिन इसके साथ ही पुरुषों के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है. शादी में तनाव हो तो पति और पति के परिवार के खिलाफधारा 498ए के तहतशिकायत दर्ज करादी जाती है और परिवार के खिलाफफौरन गैर जमानतीवारंट जारी हो जाता है.
कोई कानून नहीं
कानून के जानकारों का कहना है कि इसके अलावा 15 कानून और हैं जो बने तो पत्नियों और बहुओं की रक्षा के लिए हैं, लेकिन जिन्होंने पतियों और ससुराल वालों कीनाक में दम किया हुआ है. इसमें घरेलू हिंसा, बलात्कार और यौनउत्पीडन के कानून शामिल हैं.
पुरुषों के अधिकारों के लिएलड़ने वाले कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि देश में एक भी कानून ऐसा नहीं जो पुरुषों के हक की रक्षा कर सके या उन पर गलत मुकदमे चलने से रोक सके. इंडियास मोस्ट वॉन्टड के होस्टसोहेब इल्यासी खुद को इन्हीं कानूनों का शिकार मानते हैं. जनवरी 2000 में उनकी पत्नी की खुदकुशी की खबर आई और इल्यासी को हिरासत में ले लिया गया. डॉयचे वेले से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारा पूरासमाज समझता है कि केवल महिलाओंके साथ ही बुरा व्यवहार होता है."
इल्यासी ने इसी विषय पर एक फिल्म भी बनाई है, "इस फिल्म के जरिए हम इस बात की मांग कर रहे हैं कि मौजूदा कानूनों में बदलाव और सुधार किए जाएं और ऐसे कानून बनाए जाएंजिनसे स्त्री औरपुरुष दोनों को फायदा मिल सके."
खुदकुशी के मामले दोगुना
2011 के आंकडें बताते हैं की खुदकुशी करने वाले शादीशुदा पुरुषों की संख्या महिलाओं से दोगुनी है. भारत के क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 45 से 49 की उम्र में तो यह संख्या तीन गुना है. पुणे स्थित मेन्स राईट एसोसिएशन के अजीत राजपरी बताते हैं कि उनके पास ...
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